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इस दशहरा सोनू सूद बने देवी का देवपुरुष रूप

हर साल की तरह नवरात्रे में हर बार कुछ नया देखने को मिलता है और पंडालों की शोभा देखने योग होती है। कोरोना वायरस के वजह से इस साल पंडालों की शोभा तो देखने को नहीं मिलेगी लेकिन मां दुर्गा की प्रतिमायें हर साल की तरह इस साल भी अपनी छाप छोड़े हुए है।

कोरोना के कारण देश में लगे लॉकडाउन से दिहाड़ी मजदूरों का पलायन हुआ और इस पलायन से मजदूरों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। और इसी पलायन को देश के कई अलग अलग भाग में देवी के रूप में दिखया जा रहा है। कुछ दिन पहले देवी की एक प्रतिमा का फोटो काफी वाइरल हो रहा था। जिसमे एक महिला मजदुर अपने बच्चों के साथ पलायन करती दिख रही है और उस महिला को देवी के रूप में दिखाया गया है। औरतों को देवी का रूप माना जाता है। लेकिन इस साल मजदूरों के पलायन से आहत होकर देश के कई पुरुष देवी के रूप में अवतरित हुए और मजदूरों को उनके घर तक पहुँचाने में अपना योगदान दिया।

ऐसे ही देवी के एक रूप में सोनू सूद दिखे जो महाराष्ट्र से पलायन करते हुए मजदूरों को उनके घर तक पहुँचाया और न ही सिर्फ महाराष्ट्र से देश के और कई अलग अलग जगहों से भी उसे पहुँचाया। लोग ट्वीटर, व्हाट्सअप, फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिये उनसे जुड़े और सोनू ने उनसब की मदद की। इन सब के बावजूद सोनू और उनकी टीम दिन रात काम कर रहे थे और मजदूरों के घर जाने से ले कर उनके खाने तक की वयवस्था भी कर रहे थे। सोनू ने न सिर्फ पलायन करते मजदूरों की मदद की बल्कि देश भर से लोगों के आये निवेदन भी माने।

कोलकाता के एक पंडाल में लॉकडाउन के दौरान सोनू सूद के किये गए काम को थीम बना कर दिखाया गया है। जिसमे सोनू सूद के कामो को प्रतिमाओं के रूप में दिखाया गया है। लॉकडाउन के दौरान जितने भी वीडियोज वायरल हुए थे वे सभी पंडाल में दिखाए गए है। उसमे से एक है उत्तर प्रदेश का वो वीडियो जिसमे एक महिला अपने बेटे को ट्राली बैग पर लेटा कर रस्सी से खींचती है।

चाहे वो साईकिल पर बैठा कर अपने पिता को घर ले जाती बेटी हो या सोये हुए मजदूरों पर ट्रेन का चलना। सरे चीज़ों को काफी अच्छे तरीके से दिखया गया है। पूजा के पावन अवसर पर कोलकाता में एक दुर्गा पूजा समिति ने अपने पूजा पंडाल में सोनू सूद की मूर्ति लगाई है और उन्हें ‘भगवान’ का दर्जा दिया है। इस पर सोनू ने एक ट्वीट के जरिए आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि यह उनका अब तक का सबसे बड़ा अवॉर्ड है।

ये सारी प्रतिमाएं बोलेपुर में कारीगरों द्वारा बनाया गया हैं। कोलकाता के थीम डिज़ाइनर स्वप्न चक्रवर्ती ने कहा कि उन्हें जून में कोरोना हो गया था । क्वारंटीन रहने के कारण, वो बस न्यूज़ देखते थे, न्यूज़ में उन्हों ने देखा की लाखों मजदूर पैदल पलायन कर रहे थे, और उनका दुःख सोनू सूद ने न सिर्फ समझा बल्कि उनके दुखों का निवारण भी किया। इसी कारण वो सोनू सूद से काफी प्रभावित हुए और अपनी कला के द्वारा उन सारी चीज़ों को प्रतिमा का रूप दे दिया।