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एक मौलाना जिनका ख़ुदा सिर्फ शिक्षा

maulana abul kalam azad

भारत में हर साल 11 नवंबर को राष्‍ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है।क्यूंकि देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद जी की जयंती 11 नवंबर को होती है, इसी कारण देश में ‘राष्ट्रीय शिक्षा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। मौलाना अब्दुल कलाम आजाद का जन्म 11 नवंबर 1888 को मक्का, सऊदी अरब में हुआ था। उनका पूरा नाम अबुल कलाम गुलाम मोहिउद्दीन अहमद था लेकिन वे मौलाना आजाद के नाम से मशहूर थे। मौलाना आजाद स्वतंत्रता संग्राम के समय बड़े लीडरों में से एक थे। वह लीडर के साथ-साथ पत्रकार और लेखक थे। उनके पिता का नाम मौलाना सैयद मोहम्मद खैरुद्दीन बिन अहमद अलहुसैनी था। जो एक विद्वान थे और उन्होंने 12 किताबें लिखी थीं। उनकी मां का नाम शेख आलिया बिंते मोहम्मद था। साल 1890 में उनका परिवार मक्का से कलकत्ता शिफ्ट हो गया था। मौलाना आज़ाद का 13 की उम्र में उनकी शादी खदीजा बेगम से करवाई गयी थी।

मौलाना आजाद का संबंध एक धार्मिक परिवार से था इसलिए शुरुआत में उन्होंने इस्लामी विषयों का ही शिक्षा लिया था। उन्होंने कई भाषाओं जैसे उर्दू, हिंदी, फारसी, बंगाली, अरबी और इंग्लिश पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई थी। उन्होंने पश्चिमी दर्शनशास्त्र, इतिहास और समकालीन राजनीतिक का भी पढाई किया था। पढ़ाई के दिनों में वह काफी प्रतिभा और मजबूत इरादे वाले छात्र थे। मौलाना आजाद अपने छात्र जीवन में ही अपना पुस्तकालय चलाना शुरू कर दिया था। 16 साल की उम्र में उन्होंने सभी परंपरागत विषयों का शिक्षा पूरा कर लिया था।

कलाम की देश के प्रमुख हिंदू क्रांतिकारियों जैसे श्री औरबिंदो घोष और श्याम सुंदर चक्रवर्ती से मुलाकात हुई थी। इसी के बाद उन्होंने भारत के राष्ट्रीय आंदोलन में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। कलाम की यह कोशिश उन मुस्लिम राजनीतिज्ञों को पसंद नहीं आई जिनका झुकाव सांप्रदायिक मुद्दों की तरफ ज्यादा था। वे लोग कलाम की आलोचना करने लगे थे। इसके अलावा ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के दो राष्ट्र बनने के सिद्धांत को भी उन्होंने मना कर दिया था। वे उन पहले मुस्लिमों में से थे जिन्होंने धर्म के नाम पर एक अलग देश पाकिस्तान का निर्माण की बात को मना कर दिया था। उन्होंने अल-बलाग नाम से एक पत्रिका निकालना शुरू किया। जिसके माध्यम से उन्होंने भारतीय राष्ट्रवाद और हिंदू-मुस्लिम एकता के अपने मिशन को आगे बढ़ाना शुरू किया था।

पंडित नेहरू की कैबिनेट में 1947 से 1958 तक मौलाना अबुल कलाम आजाद को शिक्षा मंत्री बनाया गया था। वह आजादी के बाद उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से 1952 में सांसद चुने गए और भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने थे। 22 फरवरी 1958 में उनका निधन हो गया था। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया था। उन्होंने आईआईटी, आईआईएम और यूजीसी जैसे संस्थानों की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी। उनके योगदानों को देखते हुए 1992 में उनको भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। मानव संसाधान मंत्रालय ने 11 नवंबर 2008 को ऐलान किया था कि हर साल 11 नवंबर को राष्‍ट्रीय शिक्षा दिवस में मनाया जाएगा।