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खोज इत्तेफाक की, मानव शरीर में मिला नया अंग

नीदरलैंड कैंसर संस्थान के शोधकर्ताओं ने इत्तेफाक से एक नए अंग की खोज की है। उन्होंने स्लाइवरी ग्लैंड्स के एक संग्रह को पहचाना है जो गहराई से गले के ऊपरी हिस्से में पाई गई है और उन्हें ‘tubarial salivary glands’ नाम दिया है। यह आकस्मिक खोज तब की गई थी जब नीदरलैंड कैंसर संस्थान के शोधकर्ता प्रोस्टेट कैंसर का अध्ययन करने के लिए PSMA PET-CT नामक सीटी स्कैन और Positron Emission Tomography (PET) स्कैन के संयोजन का उपयोग कर रहे थे।

यह नई खोजी गई ग्लैंड की औसतन लगभग 1.5 इंच (3.9 सेंटीमीटर) लंबाई में हैं। यह कार्टिलेज के एक भाग के ऊपर पाई गई है जिसे torus tubarius कहते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, ग्लैंड, संभवतः नाक और मुंह के पीछे के ऊपरी गले को चिकना और नम करने का काम करती हैं। अभी तक माना जाता था कि नाक के पीछे के इस हिस्से (Nasopharynx) में कुछ नहीं होता है। अब तक, मनुष्यों में तीन बड़ी ज्ञात स्लाइवरी ग्लैंड्स मानी जाती थीं जो कि एक जीभ के नीचे, एक जबड़े के नीचे और एक जबड़े के पीछे है।

स्लाइवरी ग्लैंड्स हमारे मुंह में मौजूद अंगों का एक समूह है जो लार का सिक्रीशन करता है। यह स्तनधारियों में ही पाया जाता है। यह एक एक्सोक्राइन ग्रंथि है। मानव शरीर में स्लाइवरी ग्लैंड्स प्रणाली में तीन जोड़ी प्रमुख ग्रंथियां और 1,000 से अधिक छोटी ग्रंथियां होती हैं जो पूरे म्यूकोसा में फैली होती हैं। ये ग्रंथियां
निगलने, पचने, चखने, चबाने और दंत स्वच्छता के लिए आवश्यक लार का उत्पादन करती हैं।

शोधकर्ताओं का मानना है कि उनकी खोज सिर और गर्दन के कैंसर वाले कुछ कैंसर रोगियों के लिए संभावित अच्छी खबर है। सिर और गर्दन के कैंसर और जीभ या गले में ट्यूमर के साथ मरीजों का रेडियोथेरपी के साथ इलाज किया जाता था जो नई स्लाइवरी ग्लैंड्स को नुकसान पहुंचा सकते थे, और जिसका स्थान पहले ज्ञात नहीं था। शोधकर्ताओं के लिए अगला कदम यह पता लगाना है कि इन नई खोजी गई ग्रंथियों को रेडिएशन देने से कैसे बचा जाए ताकि रोगियों को कम दुष्प्रभाव का अनुभव हो और वह जीवन को बेहतर तरीके से जी सके।