एजुकेशन कॉम्पिटीशन डेस्क

असफलता से घबराएं नहीं बल्कि अपना लक्ष्य ऊंचा रखें, नीट के 18 और 17 साल के दो अनमोल रतन

क्या ऐसा भी हो सकता है की कोई 100 प्रतिशत में 200 प्रतिशत ला सके? जी हाँ आपने सही सुना। 18 साल के शोएब आफताब और यूपी के कुशीनगर जिले की रहने वाली आकांक्षा सिंह ने नीट में 720 में से 720 अंक पाकर इतिहास रच दिया है।

शोएब आफताब

शोएब ने जेईई-मेंस की परीक्षा भी दी थी और उसमें 99.7% हासिल किए। ओडिशा के रहने वाले शोएब ने बताया कि डॉक्टर बनना उनका सपना था, जो अब साकार होने जा रहा है। शोएब अपने परिवार में पहले सदस्य हैं, जो मेडिकल की पढ़ाई करेंगे और डॉक्टर बनेंगे।

अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने अपने मम्मी-पापा को दिया। उनका कहना है कि उनकी मां ने उन्हें सफल बनाने में खास भूमिका निभाई। उनकी माँ उनके लिए अपना शहर छोड़कर दूसरे शहर शोएब के साथ रहने आईं ताकि उन्हें पढाई में कोई दिक्कत न हो। शोएब अपने पढाई के प्रति इतने गंभीर थे की एक बार घर से कोटा आने के बाद ढाई साल तक वह अपने घर नहीं गए। लॉकडाउन में भी उन्होंने सारा समय कोटा में पढाई पर ही व्यतीत किया।

शोएब के लिए लोकडाउन एक वरदान साबित हुआ। उन्होंने कहा की लॉकडाउन के दौरान वे रुके नहीं, उन्होंने अपनी कमजोरियां खोजी और दूर करने की कोशीश कीं। कमजोर टॉपिक्स को बार-बार रिवाइज करते गए अपने डाउट्स भी क्लियर किये। वे रोजाना शेड्यूल बनाकर पढ़ते थे और हर सब्जेक्ट को अलग-अलग समय देते थे। उनकी ख्वाइश है की वो दिल्ली एम्स से एमबीबीएस करें।

शोएब के इस तरक्की से उनके माता- पिता और परिजन बहुत खुश हैं। शोएब का सपना है की वो एक कार्डियोलॉजी में स्पेशलिस्ट बनें और साथ हीं ऐसी बीमारियों का इलाज ढूंढें जिनका इलाज अभी तक उपलब्ध नहीं है। शोएब के इस तरक्की से आने वाले दिनों में देश को बहुत फायदा होगा और भविष्य में एक ऐसे डॉक्टर को देखने को मिलेगा जो लोगों की सेवा करता है और जिसे लोग भगवान का दर्ज़ा देते हैं।

आकांक्षा सिंह

आकांक्षा कुशीनगर के अभिनायकपुर गांव में रहती हैं। जब वह हाईस्कूल कर रहीं थीं तभी से उन्होंने नीट की तैयारी शुरू कर दी थी। वह बताती हैं कि नीट की कोचिंग के लिए वह रोज 70 किलोमीटर गोरखपुर जाती थी। बाद में 11 वीं 12वी दिल्ली में पढ़ाई की और फिर वहीं से नीट की कोचिंग की। आकांक्षा को पढ़ना और गाने सुनना पसंद है। आकांक्षा के पिता राजेंद्र कुमार राव एयरफोर्स से सेवानिवृत्त हैं जबकि मां रुचि सिंह शिक्षिका हैं और भाई अमृतांश चौथी कक्षा में पढ़ाई कर रहा है।

आकांक्षा दूसरे स्थान पर हैं जबकि टॉपर शोएब के बारे में बताती हैं कि मेरी उम्र 17 साल है जबकि उनकी उम्र 18 के आसपास है इसलिए उनके प्रथम रैंक दिया गया है। वह बताती हैं कि मैंने यह कभी नहीं सोचा था कि मैं टॉप की श्रेणी में होऊंगी। हां लेकिन मैंने मेहनत से तैयारी की थी इसलिए मुझे टॉप 40 में आने की उम्मीद है।

आकांक्षा न्यूरो सर्जन बनना चाहती है। उनका कहना है कि पढ़ने वाले बच्चों को अपने सपने को ऊंचा रखना चाहिए। छात्रों को दिखावा नहीं करना चाहिए। जो लोग नीट की तैयारी कर रहे हैं। उनके लिए आकांक्षा का कहना है कि वह असफलता से घबराएं नहीं बल्कि अपना लक्ष्य ऊंचा रखें और उसी के अनुसार तैयारी करें। सपने बड़े होने के साथ उसी लगन से तैयारी करने की भी आवश्यकता है।