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आधुनिक दुनिया का डिजिटल सर्टिफिकेट, CBSE की नई व्यवस्था

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने छात्रों के डाक्यूमेंट्स और मार्कशीट डाउनलोड करने के लिए ‘फेशियल रिकग्निशन सिस्टम’ की शुरुआत की है। 10वीं और 12वीं के छात्र बिना आधार कार्ड नंबर और मोबाइल नंबर के अपने सर्टिफिकेट को कभी भी, कहीं से भी डाउनलोड कर सकेंगे। कंप्यूटर एप्लीकेशन डेटाबेस में पहले से संग्रहित डिजिटल इमेज को मानव चेहरे से मेल खाता है। चेहरे के फीचर्स को मिलाने के लिए कंप्यूटर और मानव इंटरैक्ट करते हैं।

फेशियल रिकग्निशन सिस्टम कुछ इस तरह काम करेगा कि यह डेटाबेस में स्टोर डिजिटल इमेज से छात्र के चेहरे को मैच करेगा। यह कंप्यूटर और सामने खड़े छात्र के फेशियल फीचर्स को मैच करेगा और उसके बाद ही छात्र को एक्सेस की अनुमति देगा। यह एप्लिकेशन अब और सभी सर्टिफिकेट ‘परिणाम मंजूषा और डिजीलॉकर’ पर ‘फेसियल रिकोग्निशन सिस्टम’ से माध्यम से उपलब्ध हैं।

CBSE ने डीजी लॉकर में 12 करोड़ डिजिटल अकादमिक डाक्यूमेंट्स को पहले हीं डाल रखा है, जिसे किसी भी छात्र द्वारा मार्क शीट, पास और माइग्रेशन सर्टिफिकेट एक्सेस करने के लिए खोला जा सकता है। ऐसे स्टूडेंट्स जो डिजिलॉकर पासवर्ड या अपना मोबाइल नंबर भूल गए हैं या किसी और वजह से डिजिलॉकर नहीं खोल पा रहे तो उनके लिए यह फीचर काफी मददगार होगी। फेशियल रिकग्निशन सिस्टम की सुविधा विदेशी छात्रों और उन लोगों के लिए बहुत मदद करेगा जो आधार कार्ड या गलत मोबाइल नंबर जैसे किसी भी कारण से डिजीलॉकर खाता खोलने में असमर्थ हैं।

भारत में प्रमुख स्कूली शिक्षा बोर्ड में से एक CBSE है। भारत के अंदर और बाहार के बहुत से निजी विद्यालय इससे सम्बद्ध है। इसका प्रमुख उद्देश्य शिक्षा संस्थानों को अधिक प्रभावशाली ढंग से लाभ पहुंचाना है और उन विद्यार्थियों की शैक्षिक आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायी होना जिनके माता-पिता केन्द्रीय सरकार के कर्मचारी हैं और निरंतर स्थानान्तरणीय पदों पर कार्यरत हों।