रक्षाबंधन का त्यौहार समीप आ रहा है भाई बहन के अटूट प्रेम त्यौहार देश भर में 3 अगस्त को मनाया जायगा। इसमें बहने भाई के कलाई रक्षा का सूत्र बांधती हैं भाई भी बहन की रक्षा का संकल्प लेते हैं। माथे तिलक लगाती है। आपने कभी सोचा है ये तिलक में चावल के दाने क्यों होतें हैं, क्या आप इसके पीछे की वजह जानते हैं ?

वैज्ञानिक दष्टिकोण से देखा जाए तो तिलक लगाने से दिमाग में शांति और शीतलता बनी रहती है। यहां चावल लगाने का कारण ये भी माना जाता कि सफेद रंग के चावल में शुद्धता पायी जाती है। पूजन के समय माथे पर कुमकुम के तिलक लगाने के बाद चावल के दाने का प्रयोग करना अच्छा भी लगता शास्त्रों के अनुसार, हविष्य यानि हवन में देवताओं को चावल चढ़ाया जाता है। क्योंकि इसे शुद्ध अन्न माना जाता है, और ऐसी मान्यता है कि कच्चा चावल सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करता है। हमारे आसपास जो भी नकारात्मक ऊर्जा आ रही हो या पहले से उपस्थित हो, वो सकारात्मक ऊर्जा में बदल जाए और चारो ओर खुशी का महौल फैल जाए।

भाई-बहन का पवित्र पर्व रक्षा बंधन मंगलमयी हो और इस पर्व को मनाते समय कोई भूल-चूक न हो, इसके लिए हमें कुछ पारंपरिक बातों का ध्यान रखना चाहिए। तिलक पर चावल लगाने के संदर्भ में मान्यता यह है कि चावल अत्यंत शुद्ध और शुभ अनाज है। अगर पूजा में भी कोई वस्तु कम रह जाए तो प्रतीकात्मक रुप से उस वस्तु के स्थान पर चावल रख दिए जाते हैं।

भाई को लगने वाला तिलक हर दृष्टि से शुभ हो,हर शुभ भावनाएं बनता है। इसी के साथ कच्चे चावल को सिर के पीछे भी फेंकने का रिवाज है। जिसके बाद वह व्यक्ति जिसके ऊपर से चावल फेंके गए हैं। वह अपने जीवन को सकारात्मक रूप से जिए और उसके आस- पास भी नकारात्मकता न भटके।

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