देश में जारी कोरोना संकट के बीच मुश्किल में आई अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए भारत सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज से संबंधित आज चौथे दिन  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 8 सेक्टरों में आर्थिक सुधार के लिए कई बड़े एलान किए।

  •   उन्होंने बताया कि कुछ क्षेत्रों में बड़े सुधार की जरूरत. सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है। देश में कारोबार को सुगम बनाएंगे. हमें प्रतिद्वंदिता के लिए तैयार रहना है। निवेश के लिए भारत को आकर्षक बनाना है। वित्त मंत्री ने कहा कई क्षेत्रों में नीतियों को सरल बनाने की आवश्यकता है, ताकि लोगों को यह समझना सरल हो कि इस क्षेत्र से क्या मिल सकता है।  लोगों की भागेदारी बढ़े और पारदर्शिता आ सके।  हम ऐसा करके किसी क्षेत्र के विकास और नौकरियों को बढ़ावा दे सकते।
  •   देश के 6 एयरपोर्ट को PPP मॉडल से विकसित किया जाएगा. नागरिक विमानों के लिए अधिक एयर स्पेस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। वित्त मंत्री ने कहा कि मात्र 60 फीसदी भारतीय एयर स्पेस सिविल एविएशन के लिए है। इस स्पेस का ठीक उपयोग हो, फ्यूल बचे, कम से कम समय में यात्रा स्थान तक पहुंचें, इसके लिए  काम होगा। इससे विमानन क्षेत्र को 1000 करोड़ का फायदा होगा। उन्होंने कहा कि  पीपीपी मॉडल के तहत 6 नए एयरपोर्ट्स की नीलामी होगी। इंडियन एयरक्राफ्ट्स का मेंटेनेंस और रिपेयरिंग भारत में ही हो, ऐसा सुनिश्चित किया जाएगा। एयरलाइंस की लागत कम हो, उस दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
  • कोल सेक्टर में सरकारी एकाधिकार कम किया जाएगा।  इससे कोयला उत्पादन में देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा।  कोयला क्षेत्र को 50 हजार करोड़ रुपया दिया। कॉमर्शियल माइनिंग की दी जाएगी इजाजत।
  • ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड का निगमीकरण किया जाएगा. इसके साथ ही रक्षा निर्माण में एफडीआई को 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी किया जाएगा।  
  •  डिफेंस प्रोडक्शन में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा दिया जाएगा।  ऐसे इक्विपमेंट्स की लिस्ट बनाई जाएगी जिसे देश में ही खरीदना होगा
  • वित्त मंत्री ने कहा कि परमाणु ऊर्जा से जुड़े सुधार में रिसर्च रीयेक्टर की स्थापना  पीपीपी मॉडल में होगी। इससे मानवता की सेवा को बल मिलेगा।
  • अंतरिक्ष क्षेत्र में इसरो ने भारत को काफी ख्याति दिलाई है। सरकार इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाना चाहती है। इसके लिए सरकार उपग्रहों, प्रक्षेपण एवं अंतरिक्ष आधारित सेवाओं को लेकर निजी कंपनियों को लेवल प्लेइंग फील्ड उपलब्ध कराएगी।
  • वित्त मंत्री ने कहा कि सोशल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत है। इसके लिए इसमें निजी निवेश को बल देने के लिए कुछ बदलाव किए गए हैं। इसके लिए 30 फीसद केंद्र और 30 फीसद राज्य सरकारों द्वारा फंडिंग होगी। इसके लिए 8100 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
  • केंद्रशासित प्रदेशों में बिजली वितरण कंपनियों का निजीकरण किया जाएगा। इसके लिए एक टैरिफ पॉलिसी लाई जाएगी। इसमें इस चीज का ध्यान रखा जाएगा कि उपभोक्ताओं को उनका अधिकार हासिल हो सके। साथ ही प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के जरिए सब्सिडी दी जाएगी। प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।
  • ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड का निगमीकरण उनके कामकाज में सुधार के लिए किया जाएगा। कंपनियों को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाएगा। डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में ऑटोमैटिक रूट्स के जरिए FDI की सीमा को 49 से बढ़ाकर 74 फीसद किया जाएगा।
  • रक्षा उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ बिल्कुल अपरिहार्य है। सरकार ऐसे हथियारों एवं प्लेटफॉर्म की लिस्ट अधिसूचित करेगी, जिनके आयात को प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
  • सरकार ऑर्डिनेंस फैक्टरी की स्वायत्ता, जवाबदेही और क्षमता को बेहतर बनाने के लिए ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड का कॉरपोरेटाइजेशन किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि कॉरपोरेटाइजेशन बोर्ड का निजीकरण नहीं बल्कि कॉरपोरेटाइजेशन किया जाएगा।
  • वित्त मंत्री ने कहा कि मिनरल माइनिंग में निजी निवेश बढ़ाएंगे। मिनरल में एक्सप्लोरेशन माइनिंग प्रॉडक्शन सिस्टम लाएंगे। नई व्यवस्था में 500 माइनिंग ब्लॉक्स उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसमें भी 50000 करोड़ का खर्च इन्फ्रास्ट्रक्चर पर होगा। उन्होंने कहा कि बॉक्साइट और कोयला का ज्वाइंट ऑक्शन होगा। इससे खनन में वृद्धि होगी और रोजगार सृजन होगा। लगभग 50 नए ब्लॉक खनन के लिए नीलामी पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए नियमों में ढील दी जाएगी। कोयला से गैस बनाने के लिए नए आवंटन किए जाएंगे और उन्हें प्रोत्साहन दिया जाएगा।
  • वित्त मंत्री ने कहा कि कहा की ईजीएस के जरिए निवेश को जल्द मंजूरी देंगे। उन्होंने कहा कि  इंडस्ट्रीयल इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करना है।  
  •  उन्होंने कहा कि 5 लाख हेक्टर में फैले इंडस्ट्रीयल पार्कों की जानकारी आईआईएस पर मिलेगी। इस भूमि की जीपीएस मैपिंग होगी। इससे जमीन कि उपलब्धता के मामले में सरलता होगी। प्रतेक मंत्रालय में प्रोजेक्ट इन्वेस्टमेंट सेल बनेगा।
  • आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए निवेश की गति बढ़ाने को नीतिगत सुधार किये गए हैं। सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह के जरिए निवेश को मंजूरी दिए जाने की गति को तेज किया गया है। नए निवेश को आकर्षित करने को राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा पैदा करने के लिए रैकिंग सिस्टम।
  • वित्त मंत्री ने कहा कि कई सेक्टर्स को आसान पॉलिसीज की जरूरत है। बैंकों पर किसी खास को लोन देने का दबाव न