आज के समय में ज्योतिष विज्ञान लोगों में भ्रान्ति का विषय बना हुआ है आज का वैज्ञानिक युग जब तक पूर्ण रूप से किसी विषय को प्रमाणित नहीं कर देता तब तक विश्वास नहीं करता । ज्योतिष विज्ञान इतना विस्तृत है कि इसका पूर्ण ज्ञान किसी भी ज्योतिषाचार्य के पास नहीं है । इस विषय पे नाड़ी ज्योतिष कनक झा ने बताया कि ज्योतिष विज्ञान को यदि ज्योतिष के जानकार अपने स्वार्थ को सिद्ध करने हेतु प्रयोग न करके केवल मानव हित में प्रयोग करे तो ज्योतिष मानव जीवन से उनके दुखों का निवारण करने में सहायक सिद्ध हो सकता है ।

ज्योतिष विज्ञान भारत की ऐसी प्राचीन विद्या है जो यह प्रमाणित करती है कि हमारे सौरमंडल में सूर्य के साथ-साथ सभी 9 ग्रहों का प्रत्यक्ष रूप से मानव जीवन पर प्रभाव पड़ता है । एक व्यक्ति के जन्म के समय सौरमंडल में ग्रहों की स्थिति उस व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन पर प्रभाव डालती है । एक व्यक्ति की लग्न कुंडली व चन्द्र कुंडली में ग्रहों का स्थान उसके सम्पूर्ण जीवन में सुख-दुखों से जुड़ा हुआ है ।

हमारे सौरमंडल में सूर्य के साथ-साथ चंद्रमा व अन्य ग्रहों से निकलने वाली प्रकाश की किरणें अलग-अलग रूप में दिखाई देती है व पृथ्वी को प्रभावित करती है । प्राचीन काल से ही भारत के साथ-साथ अन्य देशों के भी विद्वानों ने इन ग्रहों के पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभावों से अवगत कराया है । ज्योतिष विज्ञान भी अपनी गणितीय आंकड़ों से सौरमंडल के सभी ग्रहों की चाल का अध्ययन कर इनका पृथ्वी के जीवित प्राणियों पर पड़ने वाले शुभ और अशुभ संकेतों को विश्लेषण करने वाली विद्या है ।

नाड़ी ज्योतिष के सम्बन्ध में कनक झा ने बताया कि नाड़ी ज्योतिष यही बताती है की आपका समय कब अच्छा और खराब आने वाला है ताकि आप समय रहते उपाय कर के नुकसान से बच जाएँ। जैसे अगर हमें पता हो की अभी बारिश होगी तो हम छाता लेकर निकलेंगे ताकि भींगने से बच जाएँ। उपाय हमें छाता की तरह बचाता है ।

 जब बच्चा 10+2 कर लेता है तो एक समस्या माँ बाप के सामने रहती है की बच्चे को किस लाइन से पढाई करवाया जाए।  छोटे से उदाहरण से ज्योतिष शास्त्र के महत्व को समझ कर आप ये समझ सकते है की आपका बच्चा भविष्य में किस क्षेत्र में रूचि ले सकता है।  अगर कुंडली में अच्छी शिक्षा के योग के साथ 8वे और 12वें भाव भी सक्रीय हों तो बच्चा इंजीनियरिंग की पढ़ाई करता है क्योंकि 8 वां और 12 वां भाव रिसर्च का या गहराई का होता है। अगर दूसरे और 11 वें भाव ज्यादा सक्रीय हों तो कॉमर्स की तरफ जाना चाहिए क्योंकि दूसरा भाव accounts का है। अगर कुंडली में 6 वां 8 वां और 12 वां भाव सक्रिय हो तो Law की तरफ ले जाता है क्योंकि 6,8,12 वां भाव मुकदमेबाजी का होता है।

अतः दोस्तों ज्योतिष यही मदद करता है की पहले से ही सही दिशा चुन ले तो सफलता की सम्भावना काफी बढ़ जाती है।