ऐश्वर्य।  

हमने अपने बड़े—बुजुर्गों से यह बात सीखी है कि बुरे वक्त के लिए पैसे जरूर बचाना चाहिए। खासकर, हमारे घरों की महिलाएं इस सीख पर ज्यादा ध्यान देती हैं। वह तमाम परेशानियों के बावजूद कुछ न कुछ पैसे जरूर बचा लेती हैं। लेकिन, घर में रखे हुए इन पैसों का रिटर्निंग जीरो होता है। इसलिए, क्यों न हम अपने बच्चों के नाम पर इन पैसों को म्यूचुअल फंड में निवेश कर दें। आइए, इस स्पेशल आर्टिकल से हम यह जानते हैं कि इन छोटी—छोटी राशियों को कहां निवेश करें, ताकि उसकी रिटर्निंग अच्छी हो। 

ऐसे करें बच्चे के नाम पर निवेश

18 साल से कम उम्र के बच्चे के नाम पर ऐसा निवेश किया जा सकता है। इसमें न तो उम्र की कोई सीमा है और न ही निवेश की जाने वाली रकम की। ऐसे फोलियो में बच्चा ही पहला और इकलौता होल्डर होना चाहिए। ऐसे फोलियो में जॉइंट होल्डर की इजाजत नहीं होती है। ऐसे फोलियो में अभिभावक या तो पैरंट हों यानी माता या पिता में से कोई एक हों या कोर्ट की ओर से नियुक्त लीगल गार्डियन। बच्चे के नाम पर निवेश करने के लिए बच्चे की उम्र और बच्चे के साथ आपके रिश्ते के सबूत के वैध दस्तावेज पेश करने होंगे। आपको एज प्रूफ के रूप में बर्थ सर्टिफिकेट, सपोर्ट आदि की कॉपी देनी होगी, जिसमें बच्चे की जन्म तिथि दर्ज हो और नाबालिग बच्चे के साथ अभिभावक (नेचुरल या लीगल गार्डियन) के संबंध की जानकारी हो।

बच्चे के नाम पर सीप के नियम भी जानें

पैरंट्स चाहें तो नाबालिग बच्चे के नाम पर बनाए गए फोलियो में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान या सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान से निवेश शुरू कर सकते हैं। हालांकि, उन्हें ध्यान रखना होगा कि बच्चे के बालिग होने तक ही यह इंस्ट्रक्शन वैलिड होगा। इसके बाद एसआईपी या एसटीपी बंद हो जाएगा, भले ही इंस्ट्रक्शन उस तारीख के बाद की अवधि के लिए भी दिया गया हो।

बच्चे के बालिग होने के बाद क्या होगा

बच्चे की उम्र जब 18 साल की हो जाएगी तो सभी फोलियो सस्पेंड हो जाएंगे। बच्चे के बालिग होने की तारीख के बाद उसके गार्डियन उसके फोलियो में ट्रांजेक्शन नहीं कर सकेंगे।