तेंदुलकर चौहान। 
आपने टोल टैक्स और रोड टैक्स के बारे में सुना होगा। कई बार आपने ये टैक्स चुकाया भी होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि टोल टैक्स या रोड टैक्स क्यों लगता है। कहां—कहां हमें यह टैक्स देना पड़ता है। साथ ही इससे जुड़े प्रमुख नियम क्या हैं। आप कहां से इस टैक्स की सही जानकारी प्राप्त करेंगे या कैसे पता करेंगे कि कहां जाने में आपको कितना टोल टैक्स चुकाना पड़ेगा। आज हम आपको इन सारी विषयों की पूरी जानकारी दे रहे हैं।

क्यों लगता है टोल और रोड टैक्स 

सड़कें हमारे लिए बेहद जरूरी हैं। यह देश की संपत्ति होती है। साथ ही इसका रखरखाव भी उतना ही आवश्यक होता है। इसके रखरखाव में काफी खर्च आता है। साथ ही सड़कों तथा राजमार्गों पर किसी तरह की अव्यवस्था न हो उसके लिए सुरक्षा व्यवस्था की भी आवश्यकता होती है। इन सभी कार्यों के लिए सरकार द्वारा यात्रियों से टैक्स वसूली की जाती है। रोड टैक्स भी कई तरह के होते हैं। इसमें टोल टैक्स सबसे महत्वपूर्ण है। 

कहां लगता है टोल टैक्स 

वर्तमान निति के अनुसार हर 4 लेन और उससे अधिक लेन की सभी सड़के जिनका हम इस्तेमाल करते हैं, उसके लिए हमें टैक्स देना होता है। यहां तक की इस कैटेगरी की अंडर कंस्ट्रक्शन सड़कों पर भी हम ये टैक्स देने के लिए बाध्य होते हैं। टोल टैक्स सड़को और राजमार्गों के अलावा शहरों में अधिकतम इस्तेमाल होने वाले कई चौक पर भी लगाया जाता है। यह टैक्स भी अन्य किसी टैक्स की ही तरह अनिवार्य होता है। राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क की नीतियों के अंतर्गत यातायात कर यानी टोल टैक्स के दर में हर साल बदलाव किया जाता है और हर वर्ष 1 अप्रैल को इससे जुड़े नए नियम और दर लागू किए जाते हैं। टोल टैक्स इकठ्ठा करने की निति, राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 तथा राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क के नियमों के आधार पर बनाई गई है। वर्तमान में भारत के सड़कों तथा राष्ट्रीय राजमार्गों में अब तक 540 टोल टैक्स संग्रह केंद्र यानी टोल प्लाजा मौजूद हैं। वहीं बिहार में कुछ 20 टोल प्लाजा हैं।

रोड टैक्स क्या होता है 

आप शायद ही ये जानते होंगे कि हम जब भी कोई गाड़ी खरीदते हैं, तो शोरूम से बाहर आने के पहले ही हमें रोड टैक्स चुकाना पड़ता है। गाड़ियों के हिसाब से रोड टैक्स अलग-अलग होता है। रोड टैक्स आपकी गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के साथ ही वसूल किया जाता है। जितनी गाड़ी की कीमत होती है, उसका 6 प्रतिशत हमें सरकार को रोड टैक्स के रूप में देना होता है। ये रोड टैक्स भी हमें इसलिए देना होता है ताकि जब हम गाड़ी रोड पर चलाएंगे तो हमारे दिए रुपए से सरकार उस रोड का रखरखाव करेगी।

कितने तरह का होता है टोल टैक्स 

टोल टैक्स तीन प्रकार के होते हैं। सिंगल, मल्टीपल यानी डबल और मंथली पास। टोल प्लाजा से वाहन क्रॉस होते ही सिंगल ट्रिप वाली पर्ची की वैधता खत्म हो जाती है। वहीं, मल्टीपल ट्रिप की पर्ची 24 घंटे के अंदर आने-जाने के लिए मान्य होती है। मल्टीपल पर्ची का किराया सिंगल ट्रिप से करीब डेढ़ गुना अधिक होता है। वहीं मंथली पास महीने भर के आवागमन के लिए मान्य होता है।

कब तक लगता है टोल टैक्स 

ज्यादातर टोल टैक्स वसूली पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप से की जाती है। निजी कंपनियां राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के बड़े प्रोजेक्ट में निवेश करती हैं। बदले में उन्हें टोल वसूली का हक मिलता है। आपको याद दिला दें कि सिर्फ चार लेन या उससे ज्यादा लेन की सड़कों पर ही ये नीति लागू है। सरकार ने सड़क बनाने के लिए बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर नीति को अपनाया है। इस नीति के तहत सड़क बनाने वाला निवेशक 30 साल तक टोल वसूल सकता है। प्रोजेक्ट शुरू होते ही निवेश करने वाली कम्पनी को टोल वसूलने का हक मिल जाता है। 30 साल तक टोल टैक्स वसूली के बाद निवेशक, सड़क सरकार के हवाले कर देते हैं। मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे 5 दिसंबर 2008 से लागू हुए नियमों के तहत टोल टैक्स वसूली की अनुमति देता है। नेशनल हाईवे फीस नियम 2008 के संशोधनों के तहत ही टोल टैक्स की रकम तय होती है।

यहां से आपको मिलेगी टोल टैक्स की अपडेटेड जानकारी 

  • वेबसाइट ले सकते हैं जानकारी 
आप भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई के पोर्टल http://tis.nhai.gov.in पर जाकर टोल प्‍लाजा की सारी जानकारी ले सकते हैं। यहां आपको ताजा टोल टैक्‍स की दरें, स्ट्रैच की जानकारी, हाईवे की टोलेबल लंबाई, टोल रेट और टोल रेट को लागू होने की तारीख, छूट (अगर कोई हुई है तो), टोल प्लाजा के आस-पास की सुविधाएं, प्रतिबंधित वाहनों की सूची, मासिक जांच पिपोर्ट, अन्य जानकरी जैसे कि हेल्पलाइन नंबर, नजदीकी पुलिस स्टेशन, प्रोजेक्ट डायरेक्टर की कॉन्टेक्ट डिटेल, नजदीकी अस्पताल आदि सभी प्रकार की जानकारी आसानी से मिल जाएगी। इसके अलावा पोर्टल पर रोज का औसतन ट्रैफिक, सकल टोल राजस्व की भी जानकारी होती है। रेट एक निश्चित अंतराल पर बदलते रहते हैं। इसलिए जरूरी है कि बदलाव के बाद अपडेट किए गए रेट को चेक कर लें। आप कहीं भी टोल वसूली में या फिर ऑपरेशन संबंधित कोई भी शिकायत करना चाहते हैं तो एनएचएआई को आगाह करा सकते हैं। इसके लिए आप एनएचएआई के पोर्टल पर फीडबैक दे सकते हैं। या फिर एनएचएआई के टोल फ्री नंबर 1800-1160-62 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। एनएचएआई पोर्टल पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण में भ्रष्टाचार को उजागर करने पर आपको 25,000 रुपए नकद राशि का इनाम भी दिया जा सकता है।
  • मोबाइल एसएमएस से भी मिलेगी जानकारी 
एसएमएस के द्वारा टोल रेट को मोबाइल पर चेक करने के लिए आप 56070 पर एसएमएस भेज सकते हैं। साथ ही इन बातों का ध्यान रखें।
1. किसी राज्य के विशेष टोल प्लाजा की सूची और आईडी के लिए TIS < State Code> < NH No. > लिखें।
2. राज्य का कोड व्हिकल रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर दो करैक्टर का होना चाहिए। जैसे कि बिहार के लिए BR, दिल्ली के लिए DL आदि।
3. इसके बाद आपके पास एसएमएस के जरिए टोल प्लाजा की पूरी सूची आईडी सहित आ जाएगी।
4. किसी विशेष टोल प्लाजा पर लागू टोल रेट के लिए  TIS < Toll Plaza ID लिखें। इसके बाद टोल प्लाजा के टोल रेट एसएमएस के जरिये आपके पास आ जाएंगे।