बिहार के वरिष्ठ पत्रकार और आकाशवाणी पटना के पहले संवाददाता रविरंजन सिन्हा ने 18 अक्टूबर, 2019 की दोपहर रूबन अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली। मूलतः आरा के रहने वाले 83 वर्षीय रविरंजन सिन्हा की पहचान एक समर्पित पत्रकार, अध्यापक एवं जनसंपर्क पदाधिकारी के रूप में होती थी। इन्होंने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत अपने काॅलेज के दिनों से ही की थी। पटना विश्वविद्यालय से हिन्दी में स्नातकोत्तर की पढ़ाई करते समय बहुभाषी संवाद समिति हिन्दुस्थान समाचार के स्ट्रिंगर के रूप में इन्होंने काम शुरू किया। इस न्यूज एजेंसी को उन्होंने पटना विश्वविद्यालय की एक से एक बढ़िया स्टोरी दी। पढ़ाई पूरी कर वे सर्चलाईट से जुड़े। पटना में जब आकाशवाणी का केन्द्र खुला तो यहां के पहले संवाददाता नियुक्त किये गये। कालांतर में रसायन खाद कारखाना सिंदरी के जनसंपर्क पदाधिकारी बने, लेकिन अस्सी के दशक में अपनी नौकरी छोड़कर वे पुनः मुख्यधारा की पत्रकारिता में आ गये। डेक्कन हेराल्ड और डेक्कन क्रोनिकल के लिए कार्य करने लगे।

2005 के चुनाव में निर्वाचन प्रवेक्षक के.जे. राव का लिया गया साक्षात्कार पत्रकारिता के क्षेत्र में एक मील का पत्थर माना जा सकता है। इन्होंने पटना के रंगमंच पर लगातार लिखा। रविरंजन सिन्हा ऐसे नाट्य समीक्षक थे, जो पूरे समय नाटक देखकर ही उसके बारे में कुछ लिखते थे। अभी भी पत्रकारिता जगत में वे सक्रिय थे। पत्रकारिता के क्षेत्र में इनके समर्पित योगदान को देखते हुए विश्व संवाद केन्द्र ने इन्हें 21 मई, 2006 को सम्मानित किया था। आप कुछ वर्षों से लगातार बीमार चल रहे थे। 13 अक्टूबर को स्थिति खराब होने पर इन्हें रूबन अस्ताल में भर्ती कराया गया, जहां डाॅक्टरों ने इन्हें डेंगू से संक्रमित बताया। आप अपने पीछे दो बेटे, एक बेटी समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गये हैं। इनके बेटे आलोक मोहित हिन्दुस्तान टाइम्स, पटना में न्यूज एडिटर के तौर पर कार्य कर चुके हैं।